SeemaFitLife

आपके सेहत का राज हमारे पास…!

कान में मैल जमना: कारण, नुकसान और सफाई के सही तरीके

भूमिका

हमारे शरीर का प्रत्येक अंग अपनी एक विशेष भूमिका निभाता है, और कान उनमें से एक बेहद संवेदनशील और जरूरी अंग है। यह न केवल हमें सुनने में मदद करता है, बल्कि शरीर का संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। कान के अंदर बनने वाला मैल शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जो कान को धूल, कीड़े-मकौड़ों और संक्रमण से बचाता है।लेकिन जब यही मैल जरूरत से ज्यादा जमा हो जाता है, तो यह परेशानी का कारण बन सकता है — जैसे कान में भारीपन, दर्द, आवाज कम सुनाई देना या चक्कर आना।

कान में मैल कैसा होता है?

कान में जो पीले या भूरे रंग का पदार्थ निकलता है, उसे इयरवेक्स या सेरुमेन कहा जाता है। यह हमारे कान के अंदर की ग्रंथियों से निकलने वाला एक प्राकृतिक स्राव होता है।

इसका मुख्य कार्य है —

  • कान की नमी बनाए रखना,
  • धूल और गंदगी को अंदर जाने से रोकना,
  • और बैक्टीरिया या कीटाणुओं से सुरक्षा देना।

अगर थोड़ी मात्रा में मैल हो रहा है तो यह सामान्य और लाभदायक है, लेकिन जब यह अत्यधिक मात्रा में जमा हो जाता है, तब यह कान की नली को बंद कर सकता है और सुनने की क्षमता को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है।

आइए जानते हैं कान में मैल जमने के मुख्य कारण।

बार-बार कान में सफाई करना (फ्रीक्वेंट क्लीनिंग): कई लोग रोजाना कॉटन बड या पिन से कान साफ करते हैं, जिससे मैल बाहर आने की बजाय अंदर चलता जाता है। जिससे वह और ज्यादा जम जाता है।

कान का प्राकृतिक आकार (इयर स्ट्रक्चर): कुछ लोगों के कान की नली का आकार थोड़ा संकरा या टेढ़ा होता है, जिससे मैल आसानी से बाहर नहीं निकल पाता और मैल जमा होता चला जाता है।

अधिक तेल या धूल वाला वातावरण: कई लोग अधिक प्रदूषित या धूलभरे माहौल में रहते हैं, उनके कान में मैल जल्दी बनता है क्योंकि कान को खुद को ज्यादा सुरक्षा देनी पड़ती है।

ईयरफोन या हेडफोन का लगातार उपयोग: लंबे समय तक ईयरफोन लगाने से कान में हवा का संचार रुक जाता है, जिससे मैल सूखकर सख्त हो जाता है।

उम्र का बढ़ना: उम्र बढ़ने के साथ कान की ग्रंथियाँ सूखने लगती हैं, जिससे मैल अधिक गाढ़ा और कठोर बन जाता है।

त्वचा संबंधी समस्याएँ: जैसे —एक्जिमा या सोरायसिस जैसी बीमारियों में भी कान में मैल तेजी से जम सकता है।

जानते हैं कान में मैल जमने के नुकसान।

सुनने की क्षमता कम होना:

  • जब मैल पूरी तरह कान की नली को बंद कर देता है, तो आवाज का कंपन ईयरड्रम तक नहीं पहुँच पाता, जिससे आवाज कम सुनाई देती है।

कान में भारीपन या दबाव महसूस होना:

  • मैल के कारण कान के अंदर दबाव बढ़ जाता है, जिससे भारीपन या बंद होने जैसा अहसास होता है।

कान में दर्द या जलन:

  • कठोर या सूखा मैल कान की त्वचा को खुरच सकता है, जिससे दर्द या खुजली होती है।

सिर दर्द या चक्कर आना:

  • जब मैल बहुत ज्यादा जम जाता है, तो यह कान के संतुलन तंत्र को प्रभावित कर सकता है, जिससे चक्कर या सिर दर्द की समस्या होती है।

कान में बजना:

  • कई बार मैल के दबाव से कान में लगातार “भिनभिनाहट” या “घंटी जैसी आवाज” सुनाई देती है।

इन्फेक्शन का खतरा:

  • अगर मैल लंबे समय तक कान में रह जाए, तो उसमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जिससे संक्रमण हो सकता है, और मवाद आ सकता है।

चलिए जानते हैं कान की सफाई के सही और सुरक्षित तरीके।

कान की सफाई करते समय सबसे जरूरी है — सावधानी और धैर्य।

नीचे बताए गए तरीके घरेलू रूप से सुरक्षित और प्रभावी हैं।

1. गुनगुना तेल (वॉर्म ऑयल)

  • सरसों का तेल, नारियल तेल या जैतून तेल हल्का गुनगुना करें।
  • ड्रॉपर की मदद से 2-3 बूंदें कान में डालें।
  • 10 मिनट तक सिर को एक तरफ झुकाकर रखें।
  • इससे मैल नरम होकर खुद बाहर निकल आता है।

2. सलाइन वॉटर (नमक का घोल)

  • आप एक गिलास गुनगुने पानी में आधा चम्मच नमक मिलाएँ।
  • रुई को इसमें भिगोकर कान के पास से हल्के हाथों से लगाएँ।
  • यह कान के बाहरी हिस्से की सफाई के लिए उपयोगी है।

3. ईयर ड्रॉप

  • मार्केट में मिलने वाले ड्रॉप जैसे — वक्सोल वॉट्स आदि का प्रयोग डॉक्टर की सलाह से करें।
  • यह ड्रॉप मैल को पिघलाकर बाहर निकालने में मदद करते हैं।

4. डॉक्टर से प्रोफेशनल क्लीनिंग

  • अगर मैल बहुत सख्त हो या दर्द महसूस हो रहा हो, तो खुद साफ करने की बजाय तुरन्त डॉक्टर से दिखाएँ।
  • डॉक्टर विशेष उपकरण या मशीन से बिना नुकसान पहुंचाए मैल को निकाल सकते हैं।

कान साफ करते समय की जाने वाली आम गलतियाँ।

कॉटन बड, पिन या माचिस की तीली का उपयोग करना:

  • लेकिन ये वस्तुएं मैल को अंदर धकेल देती हैं या कान के पर्दे को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

बहुत गहरा सफाई करना:

  • कान का अंदरूनी हिस्सा खुद को साफ करने में सक्षम होता है, इसलिए बहुत अंदर तक कुछ भी डालना हानिकारक है।

डॉक्टर की सलाह बिना ईयर ड्रॉप इस्तेमाल करना:

  • हर व्यक्ति के कान की स्थिति अलग होती है, इसलिए गलत ड्रॉप से इन्फेक्शन हो सकता है।

बार-बार सफाई करना:

  • कान को हर दिन साफ करने की जरूरत नहीं होती।
  • आप सप्ताह में 1 बार या जरूरत के अनुसार ही साफ करें।

जानते हैं कुछ घरेलू नुस्खे और सावधानियाँ।

  • नियमित रूप से कान को सूखा रखें।
  • नहाने के बाद कान में पानी न रहने दें, क्योंकि नमी बैक्टीरिया को बढ़ावा देती है।
  • खानपान में विटामिन A, E और ओमेगा फैटी एसिड शामिल करें।
  • ये कान की ग्रंथियों को स्वस्थ रखते हैं।
  • तेज आवाजों से बचें और लंबे समय तक ईयरफोन का उपयोग न करें।
  • हर 6 महीने में एक बार डॉक्टर से चेकअप कराएँ, खासकर अगर बार-बार मैल जमता है या सुनाई कम देता है।

आइए जानते हैं आप डॉक्टर से कब संपर्क करें?

यदि आपको इनमें से कोई लक्षण दिखे तो आप तुरंत ही डॉक्टर से मिलें —

  • कान में तेज दर्द या सूजन होना।
  • सुनाई देना या अचानक कम हो जाना।
  • कान से मवाद या खून आना।
  • लगातार चक्कर या बजने की आवाज आना।
  • घरेलू उपाय से भी आराम न मिलना।

निष्कर्ष

कान में मैल का बनना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो हमारे कान की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। लेकिन अगर यह ज्यादा मात्रा में जम जाए, तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। गलत तरीके से कान साफ करना कभी-कभी स्थायी सुनने की समस्या तक पैदा कर सकता है।  

इसलिए कान की सफाई हमेशा सही तरीके से, धीरे-धीरे और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से ही करनी चाहिए। साफ-सुथरा और स्वस्थ कान न केवल बेहतर सुनने में मदद करता है, बल्कि आपके आत्मविश्वास और जीवन की गुणवत्ता को भी बढ़ाता है।

मेरे और भी पोस्ट पढ़े –

महिलाओं के चेहरे पर अनचाहे बाल: कारण, इलाज और घरेलू उपाय —

बार-बार पेशाब आना: कारण, लक्षण, और बचाव के आसान उपाय

जंक फूड से होने वाले नुकसान और उनसे बचाव

डिहाइड्रेशन क्या है? इसके लक्षण और कुछ घरेलू उपाय

संतुलित आहार का महत्व और इसके फायदे

इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के कुछ उपाय

प्रेगनेंसी में पीठ और कमर दर्द: कारण, प्रभाव और राहत के सम्पूर्ण उपाय

पेट साफ न होने के कारण और कुछ असरदार घरेलू उपाय

मलेरिया: कारण, लक्षण और घरेलू उपचार | एक संवेदनशील और सरल मार्गदर्शिका

गहरी साँसों की ताकत: तनाव, थकान और मानसिक दबाव से मुक्ति का प्राकृतिक उपाय

पथरी क्या है? इसके कारण, लक्षण और घरेलू उपचार

न्यूमोनिया होने के कारण, लक्षण और कुछ घरेलू |  आयुर्वेदिक उपचार

विटामिन डी की कमी: कारण, बचाव और घरेलू उपचार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *