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हार्मोन बिगड़ रहे हैं? रोज़ की ये 5 चाय बदल सकती हैं खेल!

हार्मोन हमारे शरीर के ऐसे रासायनिक संदेशवाहक हैं जो नींद, भूख, वजन, मनोदशा, मासिक धर्म चक्र, प्रजनन क्षमता और तनाव जैसी कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। थायरॉइड, पिट्यूटरी, अधिवृक्क ग्रंथि, अंडाशय और वृषण जैसी ग्रंथियां मिलकर इस पूरे सिस्टम को संभालती हैं। जब इनका संतुलन बिगड़ता है तो थकान, वजन बढ़ना या घटना, पीरियड्स की गड़बड़ी, मुंहासे, बाल झड़ना या ज्यादा उगना, हॉट फ्लैशेस और मूड स्विंग जैसी समस्याएं दिख सकती हैं।

डॉक्टर की दवा और सही जांच सबसे जरूरी होती है, लेकिन संतुलित खानपान, अच्छी नींद, नियमित व्यायाम और तनाव कम करने के साथ-साथ कुछ हर्बल चाय हल्का सहारा दे सकती हैं। यह समझना जरूरी है कि चाय इलाज का विकल्प नहीं है, बल्कि सहायक उपाय भर है।

1. ग्रीन टी हार्मोन संतुलन में कैसे मदद कर सकती है

ग्रीन टी कैमेलिया साइनेंसिस की पत्तियों से बनती है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट, खासकर EGCG नामक तत्व पाया जाता है।

इंसुलिन और मेटाबॉलिज्म पर असर:

कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि ग्रीन टी शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता को थोड़ा अच्छा और बेहतर बना सकती है और ब्लड शुगर लेवल पर हल्का सकारात्मक प्रभाव भी डाल सकती है। PCOS जैसी स्थिति, जहां इंसुलिन रेजिस्टेंस आम बात है, उसमें कुछ महिलाओं में सीमित फायदा देखा गया है। हालांकि सुधार बहुत ज्यादा नहीं होता, लेकिन नियमित सेवन से हल्का लाभ जरूर मिल सकता है।

महिला और पुरुष हार्मोन पर प्रभाव:

कुछ अवलोकन अध्ययनों में पाया गया कि जो महिलाएं नियमित रूप से ग्रीन टी पीती हैं, उनमें एस्ट्रोजन का स्तर अपेक्षाकृत स्थिर पाया गया। पुरुषों में मूड और ऊर्जा में हल्का सुधार देखा गया है, लेकिन इसे टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने वाली चाय मानना सही नहीं होगा।

सावधानी:

दिन में 2–3 कप पर्याप्त हैं। ज्यादा मात्रा में या खाली पेट लेने पर घबराहट, नींद की कमी या पेट में जलन हो सकती है।

2. पुदीने की चाय

पुदीने की चाय खासतौर पर स्पीयरमिंट से तैयार की जाती है और इसमें कैफीन नहीं होता।

एंड्रोजन पर असर:

कुछ छोटे अध्ययनों में देखा गया कि PCOS से जूझ रही महिलाओं में पुदीने की चाय का नियमित सेवन मुक्त टेस्टोस्टेरोन के स्तर को थोड़ा कम कर सकता है। इससे चेहरे या शरीर पर ज्यादा बाल आने जैसी समस्या में हल्का सुधार देखा गया।

अन्य संभावित फायदे:

यह पाचन को शांत करती है, सूजन कम कर सकती है और मन को काफी ठंडक देती है।

कैसे बनाएं:एक कप गर्म पानी में 1 चम्मच सूखा पुदीना या 5–10 ताजी पत्तियां डालकर 5–7 मिनट ढककर रखें। फिर कुछ देर बाद पिए।

3. चेस्ट ट्री टी (विटेक्स

चेस्ट ट्री, जिसे विटेक्स भी कहा जाता है, लंबे समय से पारंपरिक चिकित्सा में उपयोग होता आया है।

प्रोलैक्टिन और प्रोजेस्टेरोन पर प्रभाव:

कुछ शोध बताते हैं कि यह पिट्यूटरी ग्रंथि पर हल्का असर डालकर प्रोलैक्टिन को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। जब प्रोलैक्टिन संतुलित होता है, तो ल्यूटल फेज में प्रोजेस्टेरोन बेहतर बन सकता है, जिससे मासिक धर्म चक्र नियमित होने और PMS के लक्षण कम होने में मदद मिलती है।

सावधानियां:

गर्भावस्था, स्तनपान या हार्मोन संबंधी दवाएं लेने की स्थिति में इसका सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। कभी-कभी सिरदर्द या मतली जैसे हल्के दुष्प्रभाव हो सकते हैं

4. मार्जोरम (अजवायन) की चाय

मार्जोरम पुदीना परिवार की जड़ी-बूटी है।

PCOS और ब्लड शुगर:

एक छोटे अध्ययन में पाया गया है कि एक महीने तक दिन में दो बार मार्जोरम चाय लेने से इंसुलिन सेंसिटिविटी में हल्का सुधार और एंड्रोजन स्तर में मामूली कमी भी देखी गई।

महिला स्वास्थ्य में उपयोग:

पारंपरिक रूप से इसे पीरियड्स नियमित करने और हल्की ऐंठन कम करने के लिए उपयोग किया जाता रहा है, लेकिन वैज्ञानिक प्रमाण अभी सीमित हैं।

नोट:गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को बिना सलाह इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

5. मुलेठी की जड़ की चाय

मुलेठी की जड़ में ग्लाइसीरिज़िन नामक तत्व होता है,जो कि कोर्टिसोल के चयापचय को प्रभावित कर सकता है।

कोर्टिसोल और अन्य हार्मोन:

मुलेठी शरीर में कोर्टिसोल को टूटने से कुछ हद तक रोक सकती है। इसके कुछ तत्वों में हल्की एस्ट्रोजन जैसी गतिविधि भी पाई गई है और टेस्टोस्टेरोन कम करने की क्षमता पर भी अध्ययन हुए हैं। PCOS और हॉट फ्लैशेस में सीमित लाभ की रिपोर्ट है, लेकिन परिणाम एक समान नहीं हैं।

जोखिम:

लंबे समय तक या ज्यादा मात्रा में सेवन से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, शरीर में सूजन या पोटैशियम की कमी हो सकती है। हाई BP, हृदय या किडनी रोग वाले लोग इसे सावधानी से लें।

अंतिम बात

ग्रीन टी और अन्य हर्बल चाय शरीर को सपोर्ट जरूर कर सकती हैं, लेकिन ये हार्मोन थेरेपी या डॉक्टर की दवा का विकल्प नहीं हैं। इनके प्रभाव आमतौर पर हल्के होते हैं और हर व्यक्ति पर अलग असर पड़ सकता है।हार्मोन संतुलन के लिए समग्र तरीका अपनाना जरूरी है — संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव कम करना और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच। अगर लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे सुरक्षित कदम है।

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