आरंभ:
बवासीर, जिसे अंग्रेज़ी में हेमोरॉयड्स कहा जाता है, यह एक ऐसी स्थिति है जो कि हमारे शरीर से ज्यादा हमारे मन को पीड़ा देती है। यह सिर्फ एक शारीरिक समस्या ही नहीं, बल्कि शर्म, असहजता और अकेलेपन की भावना भी साथ लाती है। इस समय ऐसी स्थिति होती है, कि हम इस परेशानी को किसी के साथ साझा भी करने में असहाय महसूस करते हैं, ना तो हम इसका सही से इलाज कर पाते हैं और ना ही हम घर में कोई उपचार कर पाते हैं और अंदर ही अंदर तकलीफ झेलते रहते हैं जिसके कारण यह बीमारी और बढ़ते चली जाती है। खासकर महिलाओं के लिए, जो अक्सर अपनी तकलीफों को चुपचाप सहती हैं। इस आर्टिकल में हम बवासीर को एक संवेदनशील दृष्टिकोण से समझेंगे—उसकी वजहें, लक्षण, बचाव और घरेलू उपचारों के साथ।
बवासीर क्या है?
बवासीर वह स्थिति है जिसमें कि गुदा और मलद्वार के आसपास की नसें सूज जाती हैं। यह सूजन दर्द, जलन, खुजली और कभी-कभी खून निकलने का कारण बनती है। यह दो प्रकार की होती है:
आंतरिक बवासीर: जो मलद्वार के अंदर होती है, आमतौर पर दर्दरहित लेकिन इसमें खून निकल सकता है।
बाहरी बवासीर: जो गुदा के बाहर की त्वचा के नीचे होती है, इसमें दर्द, जलन और गांठ महसूस होती है।
आइये जानते हैं बवासीर के प्रमुख कारण।
बवासीर का कोई एक कारण नहीं होता, बल्कि यह आपकी जीवनशैली, खानपान और शारीरिक आदतों का परिणाम होती है:
1. कब्ज और जोर लगाना: लगातार कब्ज रहना और मल त्याग के समय जोर लगाना नसों पर दबाव डालता है, जिससे वे सूज जाती हैं।
2. गर्भावस्था: गर्भ के बढ़ते वजन से पेट और गुदा क्षेत्र की नसों पर काफी दबाव बढ़ता है, जिससे बवासीर हो सकती है।
3. लंबे समय तक बैठना: आप में ऑफिस वर्क या गाड़ी चलाने जैसी आदतें ज्यादा हैं तब ये रक्त प्रवाह को बाधित करती हैं।
4. कम फाइबर वाला आहार: जब आप कम फाइबर वाला आहार लेते है, तो इसकी कमी से मल सख्त होता है, जिससे उसका निकालना मुश्किल होता है।
5. मोटापा: आपके अधिक वजन होने से भी नसों पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
6. अनुवांशिकता: अगर आपके परिवार में किसी को बवासीर रही हो, तो यह संभावना बढ़ जाती है।
आइये जानते हैं अन्य आधार पर बवासीर की स्थिति।
ग्रेड विवरण
ग्रेड 1– इसमें सिर्फ अंदरूनी सूजन होती है, साथ ही खून आ सकता है, लेकिन गांठ बाहर नहीं आती।
ग्रेड 2–इसमें मल त्याग के समय गांठ बाहर आती है, लेकिन खुद ही अंदर चली जाती है।
ग्रेड 3–इसमें गांठ बाहर आती है और उसे हाथ से अंदर करना पड़ता है।
ग्रेड 4–इसमें गांठ बाहर रहती है और हाथ से भी अंदर नहीं जाती, और यह सबसे गंभीर स्थिति होती है।
आइये जानते हैं बवासीर के लक्षण।
बवासीर के जो लक्षण होते हैं वो धीरे-धीरे उभरते हैं और अक्सर लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं:
- शौच के समय या बाद में खून आना।
- जब गुदा क्षेत्र में दर्द, जलन या खुजली होने लगे।
- गुदा के पास गांठ या सूजन महसूस होना।
- मल त्याग के बाद बलगम का रिसाव।
- लंबे समय तक बैठने में असहजता महसूस होना।
आइये जानते हैं कुछ सावधानियाँ और बचाव।
बवासीर को रोकना संभव है, अगर हम अपनी दिनचर्या और खानपान में कुछ बदलाव करें:
1. फाइबर युक्त आहार लें
- आप जितना हो सके फाइबर युक्त आहार लें, फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालें ये सभी चीजे कब्ज से बचाव करती हैं।
2. पानी भरपूर पिएं
- आपको पानी पे बहुत ध्यान देना है आपको दिन में कम से कम 8–10 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए।
3. शौच को न रोकें
- जब आपको शौच आई हो तो आप तुरंत ही जाइये उसे रोकने का प्रयास ना करें। क्योंकि मल त्याग को रोकना नसों पर दबाव डालता है।
4. हल्की एक्सरसाइज करें
- आप रोजाना नियम बनाये योग, वॉकिंग और स्ट्रेचिंग करने की इनसे रक्त प्रवाह सुधरता है।
5. तैलीय और मसालेदार भोजन से परहेज करें।
- आप तैलीय और मसालेदार भोजन से दुरी बना लें। क्योंकि ऐसे भोजन पाचन को बिगाड़ते हैं और कब्ज बढ़ाते हैं।
6. शराब और सिगरेट से दूरी बनाएं।
- आप शराब और सिगरेट जैसी नशे की चीजों से दूर रहे। क्योंकि ये आपके शरीर को डिहाइड्रेट करते हैं और पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं।
आइये समझते है कुछ घरेलू उपचार: कोमल राहत की ओर
बवासीर के शुरुआती चरणों में कुछ घरेलू उपाय बेहद कारगर हो सकते हैं:
1. त्रिफला चूर्ण: रात को सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ त्रिफला लेने से कब्ज में बहुत राहत मिलती है।
2. गुनगुने पानी का(साइट बाथ): गुदा वाले क्षेत्र को दिन में दो बार गुनगुने पानी में बैठाकर धोने से सूजन और जलन कम होती है।
3. एलोवेरा जेल: आप एलोवेरा का उपयोग कर सकते हैं। एलोवेरा का शीतल प्रभाव दर्द और खुजली को बहुत कम करता है।
4. नारियल तेल: आपको गुदा क्षेत्र पर नारियल तेल लगाने से सूजन और जलन में काफी राहत मिलेगी है।
5. अंजीर का सेवन: यदि बवासीर के खतरे को कम करना है तो अंजीर का सेवन करें। दो चम्मच पिसी हुई अंजीर को एक गिलास पानी में मिला कर इसका सेवन करें। इसे पाचन सुधरती है साथी अंजीर मसल्स और हड्डियों को भी मजबूत करती है।
6. बर्फ की सिकाई: सूजन और दर्द को कम करने के लिए आप बर्फ की हल्की सिकाई करें।
भावनात्मक पहलू: शर्म नहीं, समझ जरूरी है।
आज के समय में भी बवासीर को लेकर समाज में शर्म और चुप्पी का माहौल है। खासकर महिलाएं इस दर्द को सहती हैं लेकिन बोल नहीं पातीं। यह आर्टिकल एक निमंत्रण है—खुद से जुड़ने का, अपने शरीर की सुनने का, और बिना शर्म के इलाज की ओर बढ़ने का।
निष्कर्ष:
बवासीर एक आम लेकिन अनदेखी समस्या है। इसे समझना, स्वीकारना और सही समय पर इसका इलाज करना बेहद ज़रूरी है। अगर हम अपने शरीर की भाषा सुनें, तो वह हमें संकेत देता है। यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी नहीं, एक भावनात्मक सहारा है—आपके लिए, आपकी सेहत के लिए।
मेरे और भी पोस्ट पढ़े –
चेहरे पर पिंपल होने के कारण और असरदार घरेलू उपचार:
स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं? और इससे कैसे बचा जा सके
सीजनल बदलाव और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता |और कुछ घरेलू उपाय
स्किन एलर्जी: कारण, लक्षण और घरेलू उपचार | त्वचा की देखभाल का आत्मीय मार्गदर्शन
आंखों में दर्द, जलन और पानी आने की समस्या: कारण और आयुर्वेदिक घरेलू उपचार
चेहरे पर झाइयां: कारण, लक्षण और घरेलू उपचार | SeemaFitLife
डिजिटल आई सिंड्रोम 2025: आँखों की नई समस्याएँ और समाधान
डिप्रेशन के कारण क्या है? इसके लक्षण और बचाव
पेट की गैस और अपच से छुटकारा पाने के घरेलू कुछ नुस्खे: शरीर की सहज भाषा को समझना
दांत दर्द: एक पीड़ा है जो भीतर तक चुभती है कारण बचाव और आयुर्वेदिक राहत
गर्भावस्था के दौरान होने वाली सामान्य समस्याएँ और उनके समाधान:
महिलाओं में वाइट डिस्चार्ज (सफेद पानी) और निचले हिस्से में खुजली के कारण घरेलू और आयुर्वेदिक उपचार!











Leave a Reply