जब शरीर थकता है, मन उदास होता है और मौसम बदलता है, तब एक हरी बेल चुपचाप अपना जादू बिखेरती है–इगिलोय इसान की थकान, सर्दी-जुकाम, और कमजोर इम्यूनिटी की शिकायत कर रहा है, वहीं आयुर्वेद की एक चमत्कारी जड़ी-बूटी गिलोय — हमारे शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत देने में बेमिसाल मानी जाती है।गिलोय को संस्कृत में ‘अमृता’ कहा गया है, जिसका मतलब होता है — अमरत्व देने वाली औषधि। यानी यह जड़ी-बूटी न सिर्फ शरीर को मजबूत बनाती है, बल्कि बीमारियों को जड़ से मिटाने की भी क्षमता रखती है।
तो आइए जानते हैं विस्तार से —
गिलोय खाने के क्या फायदे हैं, इसे कैसे और कब लेना चाहिए, और यह शरीर में कैसे काम करती है।
गिलोय क्या है?
गिलोय एक बेलनुमा पौधा है, जो आमतौर पर नीम या आम के पेड़ पर लिपटा हुआ मिलता है। इसकी बेल से एक हल्की खुशबू आती है और इसका स्वाद हल्का कड़वा होता है।
आयुर्वेद में गिलोय को त्रिदोष नाशक कहा गया है — यानी यह वात, पित्त, और कफ — तीनों दोषों को संतुलित करता है।
गिलोय में पाए जाने वाले प्रमुख तत्व:
- एल्कलॉइड्स
- ग्लाइकोसाइड्स
- स्टेरॉयड्स
- एंटीऑक्सीडेंट्स
- पॉलीसेकेराइड्स
ये सभी तत्व शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करने, संक्रमण से बचाने, और थकान दूर करने में बेहद मदद करते हैं।
1. गिलोय से बढ़ती है शरीर की इम्यूनिटी
गिलोय शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सबसे प्रभावी मानी जाती है।इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर से फ्री रेडिकल्स को निकालते हैं, जिससे कोशिकाएँ स्वस्थ रहती हैं।
नियमित सेवन से शरीर वायरस, बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन से लड़ने में सक्षम बनता है।
आइए जानते हैं की कैसे काम करती है गिलोय
गिलोय शरीर के माइक्रोफेज सेल्स को एक्टिव करती है जो किसी भी संक्रमण से लड़ने वाली पहली रक्षा पंक्ति होती है। इसीलिए गिलोय को “नेचुरल इम्यूनिटी बूस्टर” कहा जाता है।
गिलोय को आयुर्वेद में ‘फीवर ट्रीटमेंट हर्ब’ भी कहा गया है।यह शरीर से टॉक्सिन्स को निकालती है और संक्रमण को खत्म करने में मदद करती है।
टाइफाइड, डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों में गिलोय का सेवन बेहद फायदेमंद माना गया है।
डेंगू में तो गिलोय का रस प्लेटलेट्स बढ़ाने में भी मदद करता है, जिससे रिकवरी तेजी से होती है।
टिप:
डेंगू या वायरल बुखार में – 10-15 मिलीलीटर गिलोय रस को तुलसी रस के साथ मिलाकर दिन में दो बार लेना फायदेमंद है।
3. गिलोय से पाचन तंत्र मजबूत होता है
अगर आपको बार-बार गैस, अपच, या भारीपन की समस्या रहती है, तो गिलोय एक प्राकृतिक समाधान है।यह लीवर और पेट दोनों को साफ रखती है और पाचन रसों के स्राव को संतुलित करती है।
फायदे:
- भूख बढ़ाती है।
- कब्ज दूर करती है।
- शरीर से टॉक्सिन्स निकालती है।
- लीवर को डिटॉक्स करती है
कैसे लें:
गिलोय का चूर्ण या रस को सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ लें।
4. डायबिटीज वालों के लिए वरदान
गिलोय में हाइपोग्लाइसेमिक गुण होते हैं जो ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करते हैं।
आयुर्वेद में इसे ‘मधुनाशिनी’ यानी शुगर को नष्ट करने वाली जड़ी-बूटी कहा गया है।
नियमित सेवन से इंसुलिन की संवेदनशीलता बढ़ती है, जिससे शुगर का स्तर स्थिर रहता है।
हालांकि, शुगर के मरीजों को इसे डॉक्टर की सलाह से लेना चाहिए।
5. त्वचा और बालों के लिए जादू
गिलोय सिर्फ शरीर के अंदर नहीं, बल्कि बाहर से भी चमक लाती है इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व त्वचा की झुर्रियों, मुंहासों और एलर्जी को कम करते हैं।
फायदे:
- इसके उपयोग से स्किन में निखार आता है।
- एक्ने और पिंपल्स कम करता है।
- बालों की जड़ों को मजबूत बनाता है।
- बालों का झड़ना कम करता है
घरेलू नुस्खा:
गिलोय रस में नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने से स्किन साफ और ग्लोइंग बनती है।
6. मानसिक तनाव और थकान में राहत
गिलोय में एडाप्टोजेनिक गुण होते हैं जो मानसिक तनाव, चिंता, और थकान को दूर करते हैं।
यह शरीर में कॉर्टिसोल का स्तर संतुलित करती है।
- इससे नींद अच्छी आती है और मन बिल्कुल ही शांत रहता है।
नियमित सेवन से:
- एकाग्रता बढ़ती है।
- मूड अच्छा रहता है।
- थकान और आलस्य कम होता है।
7. जोड़ों के दर्द और सूजन में राहत
गिलोय में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-आर्थराइटिक गुण होते हैं।
यह गठिया, जोड़ दर्द और सूजन को कम करने में कारगर है।
कैसे लें:
गिलोय रस में हल्दी मिलाकर दिन में एक बार पीने से सूजन और दर्द में राहत मिलती है।
8. शरीर को डिटॉक्स करने में मददगार
हमारे शरीर में रोजाना कई तरह के टॉक्सिन्स जमा होते हैं — खराब खानपान, प्रदूषण और तनाव के कारण।
गिलोय शरीर से इन टॉक्सिन्स को बाहर निकालकर लिवर और किडनी को स्वस्थ रखती है।
यह एक प्राकृतिक डिटॉक्स ड्रिंक की तरह काम करती है।
जानते हैं गिलोय कैसे खाएं?
1.गिलोय का रस:
गिलोय को कई तरीकों से खाया जा सकता है
रोज सुबह खाली पेट 10–15 ml गिलोय रस गुनगुने पानी के साथ लें।
2.गिलोय की डंडी:
ताजी डंडी को पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं और दिन में एक बार पिएं।
3.गिलोय पाउडर:
आधा चम्मच पाउडर शहद के साथ सुबह लें।
4.गिलोय टैबलेट या कैप्सूल:
बाजार में उपलब्ध हर्बल कैप्सूल्स का भी सेवन किया जा सकता है।
सावधानियां
- गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए।
- डायबिटीज या ब्लड प्रेशर की दवा ले रहे मरीजों को मात्रा का ध्यान रखना चाहिए।
- अधिक मात्रा में सेवन करने से कब्ज या ब्लड शुगर बहुत कम हो सकता है।
निष्कर्ष:
गिलोय – शरीर की सुरक्षा ढाल
गिलोय एक ऐसी आयुर्वेदिक औषधि है जो इम्यूनिटी बढ़ाने, बीमारियों से बचाने, और शरीर को डिटॉक्स करने में बेजोड़ है।अगर आप सर्दी-जुकाम, थकान, या बार-बार बीमार पड़ने से परेशान हैं, तो गिलोय आपके शरीर की सुरक्षा कवच बन सकती है।
बस याद रखें —गिलोय कोई साधारण जड़ी नहीं, बल्कि प्रकृति का दिया हुआ जीवनदायिनी अमृत है।
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गिलोय एक चमत्कारी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है जो इम्यूनिटी बढ़ाती है, शरीर को डिटॉक्स करती है और बीमारियों से बचाती है। जानिए इसके सभी फायदे।
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